चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2)

चेखव एक ऐसे कथाकार जो किसी भी सामान्य परिस्थिति में भी ऐसा वातावरण ढूंढ लेते थे जो उसे ख़ास बना देता है और वे उनके पात्रों में रचे-बसे मालूम होते हैं।
उनकी तीसरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है और इन पाँचों कहानियों में मेरी सबसे पसंदीदा भी जिसे एक बार पढ़ने के बाद फिर से पढ़ने का मन करता है।

3: पहला मुकदमा

यह कहानी है एक वकील प्यात्योर्किन की जिसके लिए आज वह दिन था जिसका उसने बेसब्री से इंतजार किया था,उसकी जिंदगी का पहला मुकदमा पर वह मुकदमा हार गया और यह हार उसपर पूरी तरह हावी हो गई थी। यहाँ तक कि वह कभी वकालत न करने की भी ठान लेता है। उसका मन अपने मुवक्किल, अभियोगी और प्रतिद्वंदी वकील के लिए नकारत्मकता से भर जाता है।
उसे लगता है कि उसका प्रदर्शन बहुत खराब था और सभी उसका मजाक बना रहे थे।

ऐसे मानसिक तनाव से गुज़रते हुए वह मुख्यालय से लौट रहा था। रास्ता भी खराब था और मौसम भी खराब हो गया था। इस वजह से ड्राइवर ने उसे सरकारी जंगल के मालिक लूका के यहां रात बिताने की सलाह दी। अंधेरी रात में एक रोशनी की किरण दिखाई देने पर प्यात्योर्किन राहत का अनुभव करता है। वहाँ पहुँचने पर उसे पता चलता है कि दो लोग पहले से ही अंदर बैठे हुए है और वे दो लोग हैं पब्लिक प्रासीक्यूटर वान पैच और अभियोगी सेमेच्किन। वे भी ख़राब मौसम की वजह से वहाँ रुके थे। प्यात्योर्किन को देखते ही वे लोग उसका गर्मजोशी से स्वागत करते हैं।
यह देखकर प्यात्योर्किन आश्चर्य और संदेह के मिश्रित भाव से भर जाता है।
फिर वान पैच मुकदमे पर अपने विचार व्यक्त करता है। इसी बीच प्यात्योर्किन एक बेंच पर बैठ जाता है और कमरे की समीक्षा करने लगता है।
जो रोशनी उसे दूर से सुखद लग रही थी उसमें उसे अब बहुत सी खामियाँ नजर आने लगती हैं। उसका मन अभी भी दिन की घटनाओं के कारण घृणा से भरा हुआ है और उसे साथ ठहरे लोगों का अच्छा व्यवहार भी दिखावा लग रहा है। फिर सेमेच्किन चाय बनाता है पर उसके पास चीनी नहीं है। वह चाय तीन कपों में डालता है पर प्यात्योर्किन तीसरे कप की चाय वापस केतली में डालकर गर्म पानी भर लेता है और चीनी के टुकड़े के साथ पीने लगता है। चीनी देखकर सेमेच्किन उससे मज़ाक करता है और चाय के बदले चीनी देने को कहता है।

प्यात्योर्किन अब भी कोर्ट में हुए अपमान को याद करता है और सोने के लिए नीचे लेट जाता है। खुद को अपने कोट से ढ़ककर वह सो जाने का दिखावा करने लगता है।
इसी बीच सेमेच्किन और वान पैच एक शीर्षक पकड़कर उसपे दो घन्टे तक बहस करते हैं।प्यात्योर्किन का भी बीच-बीच में बोलने का मन करता है पर वह बुदबुदा कर रह जाता है। फिर वान पैच प्यात्योर्किन के एक तरफ लेट जाता है और सेमेच्किन के साथ उसके बारे में चर्चा करने लगता है। उसके मुताबिक प्यात्योर्किन जोश और उत्साह से भरा हुआ नौजवान है जो आगे चलकर एक कामयाब वकील बनेगा। इस तरह बातें करते हुए वे जानना चाहते हैं कि वो उनसे नाराज़ क्यों है?
यह सबकुछ प्यात्योर्किन के बर्दाश्त से बाहर हो जाता है और वह उठकर बैठ जाता है। वह उनसे बहुत कुछ कहना चाहता है पर उसकी बजाय वह फूट-फूट कर रोने लगता है। उसे ऐसी स्थिति में देखकर वान पैच और सेमेच्किन घबरा जाते हैं और इसका कारण जानना चाहते हैं।तब प्यात्योर्किन के यह कहने पर कि पूरा दिन ही धोखे से भरा और अपमानजनक था तब वान पैच समझ जाता है कि यह उसका पहला केस था और चूँकि वह भी उस स्थिति से पहले गुजर चुका था वह जान जाता है कि प्यात्योर्किन को कैसा अनुभव हो रहा है। वह उसे अच्छी तरह समझाकर सुला देता है।
इस तरह वे लोग जिन्हें प्यात्योर्किन अपना दुश्मन समझ रहा था रात भर उसकी देखभाल करते हैं और दिनभर की यातना उसके मन की कल्पना सिध्द होती है।
यहाँ पर मैंने सिर्फ़ कहानी का सारांश लिखा है जो शायद नहीं यक़ीनन मजेदार नहीं है पर अगर आप पूरी कहानी पढ़ते हैं तो सौ फ़ीसदी आप इसे दुबारा पढ़ना चाहेंगे।
चेखव ने कहानी की भूमिका और नायक की मनःस्थिति का सुंदर चित्रण किया है। पात्रों के संवाद में कहीं-कहीं अप्रिय शब्दों का प्रयोग कानों को सुखद नहीं लगता पर पूरी कहानी अंदर तक गुदगुदा जाती है और होठों पर मुस्कुराहट अपने आप आ जाती है।
इस कहानी में चेखव ने मानव मन की कल्पना जो उदाहरण प्रस्तुत किया है उससे शायद ही कोई ऐसा हो जो अछूता हो क्योंकि हम सभी के जीवन में भी ऐसी परिस्थितियां अक़्सर आती रहती हैं।कहानी में नायक के साथ ही वान पैच का व्यक्तित्व भी गहराई के साथ उभरकर सामने आया है।

सुनहरे मोती:

# रोशनी बहुत काम की चीज होती है। आदमी चाहे कितना भी मानवद्वेषी हो, अगर वह बारिश की अंधेरी रात में जंगल से गुजरते हुए रोशनी का एक कतरा भी देख लेता है तो उसे आदम जात अच्छी लगने लगती है।
# जंगल में रोशनी दूर से ही काव्यात्मक नजर आती है, निकट आने पर यह काफ़ी गद्यात्मक प्रतीत होने लगती है। वह भी नीरस और तत्वहीन गद्य।
# तुम्हारा पहला केस तुमसे अच्छी कीमत वसूल करेगा ही , मेरे प्यारे भाई।

Note: आखरी दो कहानियों के लिए चेखव भाग 3 देखें।

You may also like

Leave a Reply

Your email address will not be published.