मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 2) | DREAMING WHEELS

 मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 2) मन्नू भंडारी ने अपनी कहानियों में स्त्रियों के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए स्वतन्त्र अस्तित्व को पाने की छटपटाहट, उनके लिए निर्धारित आदर्शों से न निकल पाने की विडंबना है। स्त्री मन के अंतर्द्वंद्व को पन्नों में उतारना मन्नूजी की विशेषता है।               […]

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मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 1) | Dreaming Wheels

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 1) मन्नू भंडारी हिंदी साहित्य का एक जाना-माना नाम है। उन्होंने अनेक कहानियां, उपन्यास, पटकथाएं और नाटकों की रचना की है। उनके पिता सुखसम्पतराय भी लेखक थे सो लेखन उन्हें विरासत में मिला। यों तो वे बहुत कम उम्र से ही कहानियां लिखने लगी थीं पर प्रसिद्धि धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित होने वाले […]

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चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 3) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 3) चेखव की जिन दो कहानियों का ज़िक्र अब मैं करने जा रही हूँ ये दोनों प्रेम के दो अलग-अलग अनुभव हैं। जहां पहली कहानी में प्रेम से कहे गए दो शब्दों से पूरी जिंदगी महकती रहती है वहीं दूसरी कहानी में आकर्षण रूपी प्रेम बंधन के खयाल से ही रफ़ूचक्कर हो जाता है।  4: […]

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चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2) चेखव एक ऐसे कथाकार जो किसी भी सामान्य परिस्थिति में भी ऐसा वातावरण ढूंढ लेते थे जो उसे ख़ास बना देता है और वे उनके पात्रों में रचे-बसे मालूम होते हैं। उनकी तीसरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है और इन पाँचों कहानियों में मेरी सबसे पसंदीदा भी जिसे एक बार पढ़ने के बाद […]

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चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 1) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 1) रूसी साहित्य का एक जाना-माना लेखक जिसने अनेक विधाओं में अपनी लेखनी का जादू बिखेरा। उनकी कहानियों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे वह आपके सामने ही घटित हो रहा हो। चेखव अपने पात्रों की भावनाओं का वर्णन इस प्रकार करते हैं जैसे वह स्वयं उनके साथ हो रहा हो चाहे वह सुख-दुख हो,मन […]

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सीखने की शुरुआत: रिच डैड पुअर डैड | Dreaming Wheels

सीखने की शुरुआत: रिच डैड पुअर डैड | Dreaming Wheels पुस्तक शुरू होती है इसकी सहलेखिका शेरॉन एल. लेक्टर से जो अपने जीवन के अनुभव साझा कर रही हैं। किस प्रकार उनके माता-पिता ने उनकी परवरिश की, उन्होंने क्या हासिल किया और साथ ही साथ अपने परिवार को भी आगे बढ़ाया पर जब वही परवरिश वो अपने बच्चों को दे […]

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अपनी पहचान | Dreaming Wheels

अपनी पहचान | Dreaming Wheels ‘शांति’ और ‘सफलता’ ये ऐसे दो शब्द है जिनके लिए मैंने काम तो किया पर शायद मेहनत नहीं की। काम सुबह उठने से लेकर रात को 11 बजे तक, घर और एक शिक्षिका की प्राइवेट नौकरी के लिए। एक ऐसी नौकरी जो मैं कभी करना ही नहीं चाहती थी। मुझे याद है जब हम स्कूल […]

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