सत्य व्यास : दिल्ली दरबार  (भाग 3) | DREAMING WHEELS

सत्य व्यास : दिल्ली दरबार  (भाग 3)

सत्य व्यास : दिल्ली दरबार  (भाग 3) इस भाग में सत्य व्यास जी ने राहुल और परिधि की नेगेटिव हिस्ट्री को पॉजिटिव केमेस्ट्री में रोचक ढंग से बदलते हुए दिखाया है।         पिया ऐसो जिया में समाए गयो रे आज मैं और राहुल उस छोटे से कमरे में शिफ़्ट हो रहे हैं जिसे दिल्ली में छत पर […]

Continue Reading

सत्य व्यास : दिल्ली दरबार (भाग 2) | DREAMING WHEELS

भेद जिया के खोले ना

सत्य व्यास : दिल्ली दरबार (भाग 2) सत्य व्यास युवाओं के चहेते हैं। उन्होंने अपने उपन्यास में भी दो ऐसे युवकों का चुनाव किया है जिनका जिंदगी को देखने का नज़रिया एक-दूसरे बहुत अलग है पर हैं पक्के दोस्त। ऐसे कई उदाहरण आपको अपने आस-पास भी मिल जाएंगे और यही इस उपन्यास की खासियत है। साहिल की तरफ़ कश्ती ले […]

Continue Reading

सत्य व्यास : दिल्ली दरबार (भाग 1) | DREAMING WHEELS

  सत्य व्यास : दिल्ली दरबार (भाग 1)  सत्य व्यास आज के जमाने के जाने-माने लेखक हैं जिनके सिर्फ पाँच उपन्यास ही आए हैं पर सभी ने युवाओं के दिलों पर राज किया है। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी पुस्तकों का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है। उनका पहला उपन्यास ‘ […]

Continue Reading

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 4) | DREAMING WHEELS

 मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 4) इस संग्रह की अधिकतर कहानियां मन में एक-एक सवाल छोड़ती जाती हैं पर यह कुछ अलग है जो होठों पर मुस्कुराहट लाने में कामयाब हो जाती है। इसमें गम्भीरता के साथ हास्य का पुट है। वो कहते हैं ना ‘ शार्ट एंड स्वीट ‘ तो अब पेश है…..         […]

Continue Reading

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 3) | DREAMING WHEELS

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 3) मन्नूजी की यह कहानी एक ऐसी लड़की के मन को गहराई में जाकर टटोलने की कोशिश है जो हर बार अपने लिए खड़े तो होना चाहती है पर दूसरों के बनाए गए नियमों में बंधकर निराश होकर बैठ जाती है। 3: एक कमज़ोर लड़की की कहानी रूप तीन साल पहले बड़ी चंचल […]

Continue Reading

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 2) | DREAMING WHEELS

 मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 2) मन्नू भंडारी ने अपनी कहानियों में स्त्रियों के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए स्वतन्त्र अस्तित्व को पाने की छटपटाहट, उनके लिए निर्धारित आदर्शों से न निकल पाने की विडंबना है। स्त्री मन के अंतर्द्वंद्व को पन्नों में उतारना मन्नूजी की विशेषता है।               […]

Continue Reading

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 1) | Dreaming Wheels

मन्नू भंडारी : मैं हार गई (भाग 1) मन्नू भंडारी हिंदी साहित्य का एक जाना-माना नाम है। उन्होंने अनेक कहानियां, उपन्यास, पटकथाएं और नाटकों की रचना की है। उनके पिता सुखसम्पतराय भी लेखक थे सो लेखन उन्हें विरासत में मिला। यों तो वे बहुत कम उम्र से ही कहानियां लिखने लगी थीं पर प्रसिद्धि धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित होने वाले […]

Continue Reading

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 3) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 3) चेखव की जिन दो कहानियों का ज़िक्र अब मैं करने जा रही हूँ ये दोनों प्रेम के दो अलग-अलग अनुभव हैं। जहां पहली कहानी में प्रेम से कहे गए दो शब्दों से पूरी जिंदगी महकती रहती है वहीं दूसरी कहानी में आकर्षण रूपी प्रेम बंधन के खयाल से ही रफ़ूचक्कर हो जाता है।  4: […]

Continue Reading

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 2) चेखव एक ऐसे कथाकार जो किसी भी सामान्य परिस्थिति में भी ऐसा वातावरण ढूंढ लेते थे जो उसे ख़ास बना देता है और वे उनके पात्रों में रचे-बसे मालूम होते हैं। उनकी तीसरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है और इन पाँचों कहानियों में मेरी सबसे पसंदीदा भी जिसे एक बार पढ़ने के बाद […]

Continue Reading

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 1) | Dreaming Wheels

चेखव:संवेदनाओं का चर्चित चितेरा (भाग 1) रूसी साहित्य का एक जाना-माना लेखक जिसने अनेक विधाओं में अपनी लेखनी का जादू बिखेरा। उनकी कहानियों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे वह आपके सामने ही घटित हो रहा हो। चेखव अपने पात्रों की भावनाओं का वर्णन इस प्रकार करते हैं जैसे वह स्वयं उनके साथ हो रहा हो चाहे वह सुख-दुख हो,मन […]

Continue Reading